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बिहार में टीचर अब सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देंगे, नॉन-एकेडमिक वर्क से होंगे मुक्त—शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का सदन में ऐलान

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पटना।बिहार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के स्कूल टीचरों को अब गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाएगा।शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधान परिषद की दूसरी पाली में संकल्प प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार का मुख्य फोकस अब बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर है।टीचरों को नॉन-एकेडमिक वर्क में लगाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है।शिक्षा मंत्री ने बताया कि नॉन-एकेडमिक वर्क में लगे शिक्षकों की सूची विभाग ने मंगाई है और नियुक्तियों पर रोक पहले ही लगाई जा चुकी है।यदि कहीं टीचर फिर भी इस तरह के काम में लगे हैं तो वे विभागीय पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।वित्त रहित और सरकार से फंडेड शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के वेतन पर भी चर्चा हुई।शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस मसले पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जो शीघ्र बैठक कर समाधान निकालने की दिशा में काम करेगी।सरकार का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक निर्णय लिया जाएगा।सरकार से फंडेड मदरसा और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत लगभग 5500 टीचरों को अनुकंपा के आधार पर तीन माह का वेतन एकमुश्त देने की तैयारी है।यह कदम लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान की समस्या को दूर करेगा और शिक्षकों को राहत देगा।सदन में महिला दिवस पर सरकारी अवकाश, पंचायत प्रतिनिधियों को आर्म्स लाइसेंस, मानदेय वृद्धि, बेरोजगारी भत्ता और नए जिले या अनुमंडल बनाने जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।शिक्षा मंत्री ने कहा कि कई मामलों पर फिलहाल सरकार विचाराधीन है और कुछ प्रस्तावों पर भविष्य में निर्णय लिया जाएगा।बिहार में इस कदम से साफ संदेश गया है कि अब टीचर केवल बच्चों के भविष्य को संवारने और पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए जिम्मेदार होंगे, जबकि प्रशासनिक और कागजी कार्यों से मुक्त रहेंगे।

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